शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित समय के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता

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Judgment & Oreders: Supreme Court on Shaheen Bagh protest: Public spaces cannot be occupied 'indefinitely' News

Updated: 07 Oct 2020. and Read Time: 6 Min

Dissent and democracy go hand in hand but protests must be carried out in designated areas, a three-judge bench comprising Justices Aniruddha Bose, justices Krishna Murari and headed by justice Sanjay Kishan Kaul ruled.

अनुवादित: "असहमति और लोकतंत्र हाथों-हाथ चलता है, लेकिन विरोध प्रदर्शन प्राधिकृत क्षेत्र में किया जाना चाहिए," न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने विरोध करने के अधिकार के अंतर्गत ये निर्णय सुनाया।

07 ऑक्टूबर 2020, बुधवार : सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अनिश्चित काल तक सार्वजनिक स्थलों पर विरोध प्रदर्शन के नाम पर कब्जा नहीं किया जा सकता है। दरअसल, यह फैसला फरवरी माह में अधिवक्ता अमित साहनी द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है, जिसमें सीएए का विरोध करने वालों द्वारा शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन के कारण कालिंदी कुञ्ज की और जाने वाली सड़क की नाकेबंदी को हटाने की मांग की गई थी।

क्या था कारण ?
वर्ष 2019 में CAA (Citizenship (Amendment) Act, 2019) के 11 दिसम्बर, को संसद की राज्य सभा से पास होने के बाद 12 दिसम्बर 2019 को इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया था।
इस संशोधन में नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 2 में इस प्रकार संशोधन किया, जिससे कोई भी व्यक्ति अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदायों से संबंधित हो, भले ही वे अवैध प्रवासी हों, प्राकृतिक तरीके से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है जबकि, मुस्लिम समुदाय को इस संशोधन के दायरे से बाहर रखा गया, जिससे अवैध मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का अवसर प्राप्त करने से वंचित किया गया, इस संशोधन का लाभ मुस्लिमों को छोड़ कर अन्य छह समुदायों के अवैध प्रवासियों को उपलब्ध करवाए जाने पर और मुस्लिमों को बहिष्कृत करने से पूरे देश में 11 दिसम्बर 2019 से ही इस बिल के खिलाफ स्वर उठने शुरू हो गए थे और 15 दिसम्बर के बाद इन विरोध प्रदर्शनों ने व्यापक रूप ले लिया था।
15 दिसम्बर को ही शाहीन बाग से गुजरने वाली सड़क संख्या 13 A को सी ए ए के विरोध में धरना देकर बाधित कर दिया गया था और 1 जनवरी 2020 से कुछ प्रदर्शनकारियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी, उस समय भारत के राजधानी में शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन का केंद्र बिंदु था।
लगभग तीन माह तक चले इस प्रदर्शन को पुलिस द्वारा 24 मार्च 2020 को हटा दिया गया।

प्रदर्शनों के कारण समस्या :
इन प्रदर्शनों के कारण मथुरा रोड और नॉएडा को जोड़ने वाली कालिंदी कुञ्ज रोड को बाधित कर दिया गया था, इसके प्रभाव से रोज इस सड़क से गुजरने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया था की लोगों को उचित प्रतिबंधों के साथ विरोध करने का अधिकार है, और प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक सड़कों पर अनिश्चित काल तक कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं, केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी याचिकाकर्ता के साथ सहमति जताते हुए तर्क दिया कि उचित प्रतिबंधों के बिना पूर्ण विरोध करने का अधिकार नहीं हो सकता है।

इस सारे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
"असहमति और लोकतंत्र हाथों-हाथ चलता है, लेकिन विरोध प्रदर्शन प्राधिकृत क्षेत्र में किया जाना चाहिए,"
“विरोध के लिए सार्वजनिक स्थानों पर कब्ज़ा स्वीकार्य नहीं है। अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों के कब्जे को हटाना सुनिश्चित करना चाहिए, ”
उच्चतम न्यायलय ने सड़क पर अतिक्रमण और अवरोधों को हटाने के लिए प्रशासन को उसकी अक्षमता के लिए भी फटकार लगाई और कहा कि हालाँकि, सार्वजनिक स्थानों पर कब्ज़ा करने वालो से कब्ज़ा हटवाने के लिए उन्हें किस तरह से हटाया जाना चाहिए, यह सरकारी अधिकारियों द्वारा तय किया जाना चाहिए और उन्हें अपने कार्यों को करने के लिए अदालत के आदेशों के पीछे छिपना या इंतजार नहीं करना चाहिए,

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