IPC और CrPC में संशोधन करने की केंद्र बना रहा योजना : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी

Centre planning to amend IPC, CrPC: Union Minister Kishan Reddy
Image: Creative Commons - Batthini Vinay Kumar Goud / CC BY-SA

Centre planning to amend IPC, CrPC: Union Minister Kishan Reddy News

Updated: 05 Oct 2020.

हैदराबाद: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने रविवार को यहां कहा कि केंद्र भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन लाने की योजना बना रहा है। "केंद्र सरकार आईपीसी और सीआरपीसी में बदलाव करने की योजना के अंतर्गत, (आईपीसी, सीआरपीसी में संशोधन के लिए) सुझाव भी मांगे गए हैं।"
राज्य मंत्री रेड्डी, अंबरपेट के विधायक कलरू वेंकटेश और हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अंजनी कुमार और अन्य स्थानीय नेताओं के साथ अपने सिकंदराबाद संसदीय क्षेत्र के चुनावक्षेत्र अंबरपेट में सीसीटीवी नेटवर्क का उद्घाटन करने के लिए आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे।
उन्होंने यह भी बताया कि सितंबर माह में संसद के ऊपरी और निचले सदनों में विशेष रूप से, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए दो बिल पारित किए गए है।
उन्होंने गुजरात में प्रस्तावित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बारे में बताते हुए कहा कि यह पुलिस व्यवस्था में पुलिस की कार्य क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा और
राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय पर, उन्होंने बताया कि यह देश में छात्रों को कानून, अपराध विज्ञान (Law and Criminology) और इससे जुड़े अन्य संबंधित विषयों के ज्ञान में समृद्धता लाएगा और इसके साथ-साथ छात्रों को, फोरेंसिक विज्ञान अनुसंधान में उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम करेगा।
ये जान ले कि विशेष रूप से, आईपीसी एक ऐसा कानून है जो 1833 के चार्टर एक्ट के तहत लॉर्ड थॉमस बबिंगटन मैकाले की अध्यक्षता में 1834 में एक बोर्ड ने भारत के पहले कानून आयोग की सिफारिशों पर पीनल कोड का मसौदा तैयार किया गया था और यह 1862 के शुरुआती ब्रिटिश राज काल के दौरान ब्रिटिश भारत में लागू हुआ था और यह विभिन्न प्रकार के अपराधों जैसे कि बलात्कार, चोरी, जबरन वसूली, और हत्या आदि को, और उनके लिए दी जाने वाली सजा को परिभाषित करता है। दूसरी तरफ, सीआरपीसी अपराधियों के जाँच और दी जाने वाली सजा के लिए अपनाई जाने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को निर्धारित करता है। ।

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