एक ऐसा समाज, जहां महिलाओं को है स्वच्छंद अधिकार।

Fictious image - काल्पनिक चित्र

सहारा मरुथल की तुआरेग जनजाति :Tribe

विश्व के अधिकतर हिसों में शायद ही कोई महिला होगी जो अपने जीवन में अकेले भयमुक्त रही हो, कभी न कभी उसे मर्दों की गिद्ध वाली बुरी नजरों का सामना करना पड़ा होगा, कभी न कभी उसे अपने आत्म-सम्मान के लिए कई उपाय करने पड़े होंगें क्योंकि उपायों के बिना इस बड़ी बुरी दुनियां में शायद ही कोई सुरक्षित है।

ये दुनिया विविधताओं से भरी है, हम जिस समाज में रहते है, जिस वातावरण में रहते है उसी में घुल मिल जाते है, और वही हमारी जीवन शैली बन जाती है जिसके इलावा हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि संसार में जीवन जीने का तरीका इसके उलट भी हो सकता है। क्या आप कल्पना कर सकते है कि एक ऐसा समाज भी हो सकता है जहां समाज की महिलाओं को स्वच्छंद अधिकार प्राप्त है, जो वो चाहती हैं वो कर सकतीं है।

तपती मरुभूमि में रहस्य और रोमांस की आभा के बीच एक खानाबदोश जनजाति जिसे तुआरेग के नाम से जाना जाता है। इस समाज की महिलायें विवाह से पूर्व पुरुषों से संबंध स्थापित कर सकती है, वो अपनी इच्छा से किसी भी मर्द को अपना जीवन साथी बना सकती है, और इतना ही नहीं, वो विवाहोपरांत किसी बहरी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बना सकती हैं। तथा महिलाये अपनी इच्छा अनुसार मनपसंद मर्द से शादी करती है और अनबन होने पर अपनी इच्छानुसार तलाक भी ले सकती है।

इस जनजाति की महिलाएं संबंधों की निजता और गोपनीयता बनाये रखने के लिए पुरुषों से सम्बन्ध स्थापित करने से पहले कुछ नियमों का पालन करती है जिसमे पुरुषों के लिए यह शर्त होती है कि वो महिला से सम्बन्ध बनाने के लिए उसके पास सूर्यास्त के बाद आएगा और सूर्योदय से पहले चला जाएगा। कबीले में टेंट और जानवरों का स्वामित्व भी उन्ही का होता है... यह सब असंभव लगता है, पर सत्य है और ऐसा ही बड़े-बड़े लेखों द्वारा प्रचारित भी किया गया है।

तुआरेग, इतिहास में लंबे समय तक योद्धाओं और व्यापारियों के रूप में जाना जाता रहा है और ये लोग, शुष्क और बीहड़ सहारा रेगिस्तान में एक सक्षम मार्गदर्शक भी सिद्ध हुए है। तुआरेग बर्बर समूह की जनजाति है, जिसके लगभग 2 मिलियन की जनसँख्या के घुमंतू लोग है जो सदियों से चाड, लीबिया, अल्जीरिया, नाइजर और सहारा रेगिस्तान में रहते है और उत्तरी अफ्रीकी के देश माली में ही करीब 10 लाख लोग रहते है।

ये अधिकतर मुस्लिम धर्म से जुड़े हुए खानाबदोश लोग है, जिनका अधिकांश कार्य तुआरेग कला के रूप में गहने, चमड़े और धातु की काठी की सजावट और बारीक धारवाली तलवारों के रूप प्रसिद्ध है। तुआरेग जनजाति के पुरुषों को "सहारा के ब्लू मेन" के रूप में जाना जाता है क्योंकि इस जाति के लोग अधिकतर गहरे नीले रंग के कपडे और हिजाब पहनना पसंद करते है जिससे से उन्हें सहारा के गर्म मौसम में आराम महसूस होता है। ये लोग अधिकतर ऊंठों का व्यापार करते है।

तुआरेग की आबादी कई देशों की सीमाओं में फैली हुई है, लेकिन सबसे बड़ी सघनता माली में है, जिसकी अनुमानित संख्या 950,000 है। Tuaregs मध्य पूर्व के कुर्द की तरह हैं। वे एक महत्वपूर्ण जातीय आबादी हैं जो कई देशों की सीमाओं को पार करते हैं, लेकिन किसी एक देश में उनका बहुमत नहीं है। नतीजतन, कई Tuaregs बेहतर प्रतिनिधित्व या अपने स्वयं के क्षेत्र के लिए स्थानीय सरकारों पर दबाव डाल रहे हैं।

अंत में : हर जाति, प्रजाति, धर्म और समुदाय की अपनी कुछ प्रथाएं होती है जिनका हर किसी को समान करना चाहिए। तुआरेग जनजाति की प्रथाओं में महिलाओं को कुछ खुले अधिकार प्राप्त है जिसके कारण उनके परिवार पर महिलाओं का वर्चस्व रहता है, मगर इसका मतलब यह नहीं की वो अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करती होंगी, जैसाकि कई लेखों में इस प्रजाति के बारे में बढ़ा चढ़ा के लिखा गया है। तुआरेग जाति के लोग अपने धर्म का समान करते है, वे कुशल योद्धा है, वे निरन्तर कठिन परिस्थितियों में रहते हुए अपने अस्तित्व को बचाए हुएं है।

Credits: Image: Creative Commons - Photo by MoshyPelusha - Mary Campos - Source Pixabay
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