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तब्लीगी जमात के कुछ एक विदेशी सदस्य पर लगाए गए सभी अपराधों को दिल्ली की एक अदालत ने ख़ारिज किया - आदेश पढ़ें।

Judgment & Oreders Light Version

In the absence of any record or any credible material placed before this court in the present chargesheet or any of the documents attached along with it, so as to proceed further against the accused as already discussed above accused namely Nurbek Dosmukanbet Uulu is hereby discharged from all offences in the present case.

दिल्ली में एक निचली अदालत ने IPC की धारा 269, 270, 271 और 144 CrPC के विभिन्न प्रावधानों के तहत तब्लीगी जमात से जुड़े कुछ एक विदेशी सदस्यों को, उनके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों से उन्मुक्त (Discharge) कर दिया। मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहन कौर ने कहा कि अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए वर्तमान आरोपपत्र या इसके साथ संलग्न किसी भी दस्तावेज या आलेख में विश्वसनीय सामग्री का अभाव है, इसलिए आरोपी के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए जैसा कि पहले ही चर्चा हो चुकी है, आरोपी नूरबेक डोसुमनेबेट उलु, को वर्तमान मामले में सभी अपराधों से मुक्त किया जाता है।

पुलिस द्वारा जमा किये गए आरोप पत्र के अनुसार 21 मार्च 2020 को दिल्ली पुलिस द्वारा तब्लीगी जमात मरकज़ के मुख्यालय में अधिकारियों से संपर्क किया गया था और मरकज में मुफ़्ती शहज़ाद नाम के व्यक्ति को कोरोना संक्रमण - COVID-19 बीमारी से अवगत कराया और उन्हें जमात के सभी विदेशी सदस्यों को उनके अपने देशों और अन्य भारतीयों को उनके राज्यों में वापस भेजने के लिए कहा गया। भारत सरकार के 24 मार्च 2020 के एक आदेशानुसार सम्पूर्ण भारत में 25 मार्च 2020 से 21 दिनों के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। आरोप पत्र के अनुसार मरकज के प्रबंधन और मौलाना साद को दिनांक 24.03.2020 सुचना सं। 293 SHO/HND, और दिनांक 28.03.2020 को सुचना संख्या 717/SC-ACP / लाजपत नगर, नई दिल्ली द्वारा लिखित नोटिस दिया गया जिसपर उनहोंने कोई ध्यान नहीं दिया और नतीज़तन भारत के विभिन्न राज्यों के आलावा विदेशों से आए हुए 1300 से अधिक लोग मरकज में निवास करते हुए पाए गए जो समाजिक दुरी का पालन नहीं कर रहे थे और साथ सही मास्क और सेंटाइज़र का प्रयोग भी नहीं कर रहे थे।

आरोपपत्र में आगे उल्लेख किया गया है कि 28.03.2020 को मरकज में रहने वाले 1500 व्यक्तियों में से 32 व्यक्तियों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए थे और उन्हें अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया था, और 31.03.2020 तक आगे बढ़कर 207 व्यक्तियों को विभिन्न अस्पतालों और लगभग 860 लोगों को क्वारंटाइन किया गया था। आरोप पत्र में यह भी बताया गया कि 6 मौतों के अलावा, धार्मिक समारोह में भाग लेने वाले 477 व्यक्तियों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए।

पुलिस के आरोपपत्र के अनुसार अभियुक्तों और सह-आरोपितों ने प्रशासन के किसी निर्देश या आदेश का कोई पालन नहीं किया जिसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई और संक्रमण फैलने से औरों की जान को खतरा उत्पन्न कर दिया, इस कारण पुलिस ने इन विदेशियों के खिलाफ Cr.P.C 144, IPC 269, IPC 270 और IPC 271 का मुकदमा दायर कर दिया।

सुनवाई के दौरान वचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोप पत्र में किसी भी आरोपित व्यक्तियों की भूमिका के लिए कुछ नहीं कहा गया, इसके इलावा वचाव पक्ष ने कई और भी दलीले दी।

जानने के लिए आर्डर पढ़े। अदालत का आर्डर : Case No. 1582/2020 FIR No. 63/2020 (38) State Vs. Nurbek Dosmukanbet Uulu PS Crime Branch, South East

इससे पहले 21 अगस्त 2020 को, बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ की न्यायमूर्ति टीवी नलवाडे और न्यायमूर्ति एमजी सेवलिकर की खंडपीठ ने बहुत ही कड़े शब्दों में टिपण्णी करते हुए एक फैसले में घाना, आइवरी कोस्ट, तंजानिया, जिबूती, बेनिन और इंडोनेशिया जैसे देशों से संबंधित 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द कर दिया था। महामारी रोग अधिनियम, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, भारतीय दण्ड संहिता (IPC), आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी नागरिक अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज एक एफआईआर, जिसमे आरोपियों पर टूरिस्ट वीजा का उल्‍लंघन कर दिल्ली स्थिति निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने आरोप लगाया गया था।

There was big propaganda in print media and electronic media against the foreigners who had come to Markaz Delhi and an attempt was made to create a picture that these foreigners were responsible for spreading covid-19 virus in India. There was virtually persecution against these foreigners. A political Government tries to find the scapegoat when there is pandemic or calamity and the circumstances show that there is probability that these foreigners were chosen to make them scapegoats.

अदालत का आर्डर : CRIMINAL WRIT PETITION NO. 548 OF 2020

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