IPC 6 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 6

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भारतीय दण्ड संहिता की धारा 6

संहिता में की परिभाषाओं का अपवादों के अध्यधीन समझा जाना-- इस संहिता में सर्वत्र, अपराध की हर परिभाषा, हर दण्ड उपबंध और हर ऐसी परिभाषा या दण्ड उपबंध का हर दृष्टांत, “साधारण अपवाद शीर्षक वाले अध्याय में अन्तर्विष्ट अपवादों के अध्यधीन समझा जाएगा, चाहे उन अपवादों को ऐसी परिभाषा, दण्ड उपबंध या दृष्टांत में दुहराया न गया हो ।

दृष्टांत
(क) इस संहिता की वे धाराएं, जिनमें अपराधों की परिभाषाएं अन्तर्विष्ट हैं, यह अभिव्यक्त नहीं करती कि सात वर्ष से कम आयु का शिशु ऐसे अपराध नहीं कर सकता, किन्तु परिभाषाएं उस साधारण अपवाद के अध्यधीन समझी जानी हैं जिसमें यह उपबन्धित है कि कोई बात, जो सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है, अपराध नहीं है ।

(ख) क, एक पुलिस आफिसर, वारण्ट के बिना, को, जिसने हत्या की है, पकड़ लेता है । यहां क सदोष परिरोध के अपराध का दोषी नहीं है, क्योंकि वह को पकड़ने के लिए विधि द्वारा आबद्ध था, और इसलिए यह मामला उस साधारण अपवाद के अन्तर्गत आ जाता है, जिसमें यह उपबन्धित है कि “कोई बात अपराध नहीं है जो किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो ।

Indian Penal Code Section 6

Definitions in the Code to be understood subject to exceptions.-- Throughout this Code every definition of an offence, every penal provision and every illustration of every such definition or penal provision, shall be understood subject to the exceptions contained in the Chapter entitled "General Exceptions", though those exceptions are not repeated in such definition, penal provision, or illustration.

Illustrations
(a) The sections, in this Code, which contain definitions of offences, do not express that a child under seven years of age cannot commit such offences; but the definitions are to be understood subject to the general exception which provides that nothing shall be an offence which done by child under seven years of age.

(b) A, a police-officer, without warrant, apprehends Z who has committed murder. Here A is not guilty of the offence of wrongful confinement; for he was bound by law to apprehend Z, and therefore the case falls within the general exception which provides that "nothing is an offence which is done by a person who is bound by law to do it".

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