IPC 148 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 148

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भारतीय दण्ड संहिता की धारा 148

घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना-- जो कोई घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मॄत्यु कारित होनी संभाव्य हो, सज्जित होते हुए बल्वा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करनातीन वर्ष का कारावास या जुर्मना या दोनोंकॉग्निजबलजमानती
विचारणीय - प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा कम्पाउंडबल अपराध की सूचि में सूचीबद्ध नहीं है।

Indian Penal Code Section 148

Rioting, armed with deadly weapon.-- Whoever is guilty of rioting, being armed with a deadly weapon or with anything which, used as a weapon of offence, is likely to cause death, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
Rioting, armed with deadly weapon.Imprisonment Three Years or Fine or Both.CognizableBailable
Triable By - Magistrate First ClassOffence is NOT listed under Compoundable Offences
जब भी कोई व्यक्ति, घातक, जानलेवा हथियारों के साथ कोई दंगा करता है या दंगे में भाग लेता है तो उस पर आई.पी.सी. की धारा 148 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। शिकायत होने पर पुलिस इसका संज्ञान ले कर व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है। चूकिं यह धारा जमानती है, इसलिए आरोपी गिरफ्तार होने पर जमानत ले सकता है। दोष सिद्ध होने पर आरोपी को तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों दंड के रूप में भुगतने पड़ सकते है।

आई.पी.सी. की धारा 148 का मामला जो सुर्खियों में रहा :
1. हाल की ही घटना जो 25 अगस्त 2017 को गुरमीत राम रहीम को सजा होने के बाद पंचकूला और आस-पास के स्थानों में जो हिंसा हुई और जिसमे जान माल का भी नुक्सान हुआ। इन दंगों के स्थानीय पुलिस ने विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामले दर्ज किये जिसमे से एक धारा 148 भी थी। देखें: संदर्भ
ध्यान दें: यहाँ पर ऊपर दिया गया उदाहरण केवल भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और किए गए अपराधों के तालमेल को समझने के लिए दिया गया है और इसी लिए उदाहरण को चर्चित समाचार के माध्यम से बताने की चेष्ठा की गई है। साक्ष्य के रूप में उन समाचारों के लिंक को उपर प्रस्तुत किया गया है जो उदाहरण के लिए प्रयोग किए गए है। अतः यह उदाहरण मन गढ़ंत नहीं है।

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