IPC Section 100 in Hindi - आईपीसी धारा 100 क्या है

मित्रों, प्रकृति ने हर जीव को जीने के अधिकार के अतिरिक्त एक अनोखा अधिकार प्रदान किया है,
जरा सोचिए, वो क्या है ?
मानव हो या पशु, पक्षी हो या पानी में रहने वाला कोई जीव और सूक्ष्म प्राणी जैसे चींटी हो या विशालकाय हाथी, सब प्रकृति द्वारा दिए गए इस एक अधिकार का प्रयोग अपने जान पर हुए किसी भी हमले से अपनी रक्षा करने के लिए करते है और वो अधिकार है आत्मरक्षा का
पर ये शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार क्या है ?
आइए समझते है : भारत के हर नागरिक का भारत पर बराबर का अधिकार है, और इसी अधिकार के तहत हर नागरिक की सुरक्षा का दायित्व भारत की सरकार या स्थानीय सरकार पर है, पर क्या ये सम्भव है कि हर व्यक्ति को हर समय, किसी भी परिस्थिति में तुरंत सुरक्षा उपलब्ध करवाई जा सकें ? इसका जबाब है नहीं। इसीलिए, भारतीय दंड संहिता की धारा 100 के अंतर्गत हर नागरिक को अपने शरीर की निजी तौर पर, उसके शरीर पर हुए घातक हमले या हमले की आशंका होने पर अपने शरीर की रक्षा करने का अधिकार प्रदान किया गया है, परन्तु आवश्यकता पड़ने पर इस अधिकार को किन परिस्थितियों में और किस हद तक प्रयोग किया जा सकता है यह इस आई.पी.सी की धारा में विस्तार से बताया गया है।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 100

शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मॄत्यु कारित करने पर कब होता है--- शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, पूर्ववर्ती अंतिम धारा में वर्णित निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, हमलावर की स्वेच्छया मॄत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक है, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात् प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात् :--
पहला-- ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम मॄत्यु होगा ।

दूसरा-- ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम घोर उपहति होगा ;

तीसरा-- बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला ;

चौथा-- प्रकॄति-विरुद्ध काम-तॄष्णा की तॄप्ति के आशय से किया गया हमला ;

पांचवां-- व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला ;

छठा-- इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाए, जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगा ।

1[सातवां-- तेज़ाब फेंकने या सेवन कराने का कार्य या तेज़ाब फेकने या सेवन कराने का प्रयत्न, जो युक्तियुक्त रूप से यह आशंका उत्पन्न कर सकेगा कि घोर उपहति अन्यथा ऐसे कार्य का परिणाम होगी। ]

किन परिस्थितियों में मानव हत्या अपराध नहीं होगी ? Detailed Information

1. Inserted by the Criminal Law (Amendment)Act, 2013(w.e.f. 03-02-2013)

इंग्लिश में पढ़े

Other topics we are working on: Section 100 ipc case law, Punishment, what is bailable

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