IPC 484 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 484 - Counterfeiting a mark used by a public servant

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 484

लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए चिह्न का कूटकरण-- जो कोई किसी सम्पत्ति- चिह्न का, जो लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाया जाता हो ; या किसी ऐसे चिह्न का, जो लोक सेवक द्वारा यह द्योतन करने के लिए उपयोग में लाया जाता हो कि कोई सम्पत्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा या किसी विशिष्ट समय या स्थान पर विनिर्मित की गई है, या यह कि वह सम्पत्ति किसी विशिष्ट क्वालिटी की है या किसी विशिष्ट कार्यालय में से पारित हो चुकी है, या यह कि किसी छूट की हकदार है, कूटकरण करेगा, या किसी ऐसे चिह्न को उसे कूटकॄत जानते हुए असली के रूप में उपयोग में लाएगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए चिह्न का कूटकरण। तीन वर्ष तक का कारावास और जुर्माना।असंज्ञेय या नॉन-काग्निज़बल जमानती
विचारणीय : प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट द्वारा यह अपराध कम्पाउंडबल अपराध की सूचि में सूचीबद्ध नहीं हैं।

IPC 484 - English

Counterfeiting a mark used by a public servant. -- Whoever counterfeits any property mark used by a public servant, or any mark used by a public servant to denote that any property has been manufactured by a particular person or at a particular time or place, or that the property is of a particular quality or has passed through a particular office, or that it is entitled to any exemption, or uses as genuine any such mark knowing the same to be counterfeit, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine.

PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
Counterfeiting a mark used by a public servant.Imprisonment may extend to Three Years and Fine.Non-CognizableBailable
Triable By: Magistrate First ClassOffence is NOT listed under Compoundable Offences
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