IPC 181 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 181 - False statement on oath or affirmation to public servant or person authorised to administer an oath or affirmation

Updated By: Help-Line

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 181

शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन-- जो कोई किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति से, जो ऐसे शपथ [दिलाने या प्रतिज्ञान] देने के लिए विधि द्वारा प्राधिकॄत हो, किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए शपथ [या प्रतिज्ञान] द्वारा वैध रूप से आबद्ध होते हुए ऐसे लोक सेवक या यथापूर्वोक्त अन्य व्यक्ति से उस विषय के संबंध में कोई ऐसा कथन करेगा, जो मिथ्या है, और जिसके मिथ्या होने का या तो उसे ज्ञान है, या विश्वास है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन। तीन वर्ष तक का कारावास और जुर्माना।असंज्ञेय या नॉन-काग्निज़बल जमानती
विचारणीय : प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट द्वारा कम्पाउंडबल अपराध की सूचि में सूचीबद्ध नहीं है।

Indian Penal Code Section 181

False statement on oath or affirmation to public servant or person authorised to administer an oath or affirmation. -- Whoever, being legally bound by an oath [or affirmation] to state the truth on any subject to any public servant or other person authorised by law to administer such oath [or affirmation], makes, to such public servant or other person as aforesaid, touching that subject, any statement which is false, and which he either knows or believes to be false or does not believe to be true, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine.

PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
False statement on oath or affirmation to public servant or person authorised to administer an oath or affirmation.Imprisonment may extend to Three Years and with fineNon-CognizableBailable
Triable By: Magistrate First ClassOffence is NOT listed under Compoundable Offences

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