वृद्ध मां से पति को अलग रहने के लिए मजबूर करना पत्नी की क्रूरता-Judgement

पत्नी द्वारा अपने पति को उसके परिवार, जिसमे उसके वृद्ध बीमार माता-पिता शामिल हैं, से अलग होने के लिए मजबूर करने पर पत्नी द्वारा पति पर मानसिक क्रूरता का होना सिद्ध हुआ इसलिए तलाक की अनुमति दी गई।
पति द्वारा दायर अपील की अनुमति देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बेंच ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 (1) (आई-ए) के आधार पर पत्नी द्वारा पति पर मानसिक क्रूरता को प्रमाणिक मानते हुए उनका विवाह-विच्छेद कर दिया।
पति-पत्नी जिनका विवाह 21.1.2002 को हुआ था और पति जो अपनी वृद्ध बीमार माँ का एकलौता पुत्र था और उसके साथ रहता था। उसकी माँ ने ही उसे पाल-पोस कर बड़ा किया था क्योंकि उसके पिता का बहुत पहले देहांत हो गया था। पति पर उसकी पत्नी विवाह के बाद से ही माँ से अलग रहने का दबाव बना रही थी इस पर पति ने फैमिली कोर्ट में हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 13 (1)(i-a) के अंतर्गत आवेदन किया था जोकि फॅमिली कोर्ट द्वारा 5.9.2014 को ख़ारिज कर दिया गया।
2014 में ही पति ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जिसकी सुनवाई में प्रतिवादी उसकी पत्नी ने स्वीकारा कि वह 2010 से अपने पति के साथ नहीं रह रही है और यह भी स्वीकारा की वह अपनी सास के साथ नहीं रहेगी इसके साथ-साथ उसने कई और बाते भी बताई जिससे यह साबित होता था कि वह अपने पति पर माँ से अलग होने का दबाब बना रही है।
सुनवाई के बाद अपने निर्णय में उच्च-न्यायलय ने नरेंद्र बनाम के.मीणा (Narendra Vs. K. Meena) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया जिसमें यह कहा गया था कि अगर पत्नी बिना उचित कारण / आधार के वृद्ध माता-पिता से या परिवार से अलग रहने के लिए पति पर दबाव डालती है तो वह क्रूरता होगी।
विस्तृत जानकारी के लिए निर्णय पूरा पढ़ें: :

बलात्कार एक घृणित अपराध
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