दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 468

1अध्याय 36 - दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा 468 - परिसीमा-काल की समाप्ति के पश्चात संज्ञान का वर्जन--

(1). इस संहिता में अन्यत्र जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई न्यायालय उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट प्रवर्ग के किसी अपराध का संज्ञान परिसीमा-काल की समाप्ति के पश्चात नहीं करेगा।
(2). परिसीमा-काल,--
(क) छह मॉस होगा, यदि अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय है;
(ख) एक वर्ष होगा, यदि अपराध एक वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय है;
(ग) तीन वर्ष होगा, यदि अपराध एक वर्ष से अधिक किन्तु तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय है।
2[(3). इस धारा के प्रयोजनों के लिए उन अपराधों के संबंध में, जिनका एक साथ विचारण किया जा सकता है, परिसीमा-काल उस अपराध के अपराध के प्रतिनिर्देश से अवधारित किया जाएगा जो, यथास्थिति, कठोरतर दंड से दंडनीय है।]
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1. इस अध्याय के उपबंध कतिपय अपराधों को लागू नहीं होंगे, देखिए आर्थिक अपराध (परिसीमा का लागू न होना) अधिनियम, 1974 (1974 का 12) की धारा 2 और अनुसूची।
2. 1978 के अधिनियम संख्यां 45 की धारा 33 द्वारा अंत:स्थापित।
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बलात्कार एक घृणित अपराध
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