साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B(4) के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं

पूरा आदेश पढ़ें:
उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के अनुसार अगर किसी मामले में पक्षकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है और पक्षकार उस यंत्र का स्वामित्व नहीं रखता है जिससे वह साक्ष्य लिया गया है तो पक्षकार को साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B(4) के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है ।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने 30 जनवरी 2018 को एक विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई के बाद इस कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए यह व्यवस्था दी। इस याचिका की सुनवाई के समय इस बात पर आशंका व्यक्त की गई कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B(4) के अंतर्गत यदि साक्ष्य के रूप में कोई बयान दिया गया है तो उक्त प्रावधानों के तहत उस व्यवस्था या उस मशीन को चलाने वाले उच्च पद पर बैठे किसी व्यक्ति से प्रमाणपत्र चाहिए या नही। इस मामले में पीठ ने कई अन्य मुकदमों के उदाहरण भी दिए। इस मामले से संबंधित व्यवस्था (आदेश) के संदर्भ में एक प्रतिलिपि आपके लिए प्रस्तुत की गई है।
(12) Accordingly, we clarify the legal position on the subject on the admissibility of the electronic evidence, especially by a party who is not in possession of device from which the document is produced. Such party cannot be required to produce certificate under Section 65B(4) of the Evidence 9 Act. The applicability of requirement of certificate being procedural can be relaxed by Court wherever interest of justice so justifies.
उच्चतम न्यायालय की पीठ ने इस मामले की सुनवाई को "अपराधस्थल पर हुई विडियोग्राफी को साक्ष्य के रूप में प्रयोग करने और स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के बारे में अंतिम रूप से रोडमैप बनाने पर विचार के लिए 13 फरवरी 2018 तक के लिए स्थगित कर दिया।
विस्तृत जानकारी के लिए अधिसूचना देंखें :

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