Syphilis (सिफलिस यौन-रोग) Sexually Transmitted Diseases - Hindi

Syphilis (सिफलिस यौन-रोग) Sexually Transmitted Diseases - उपदंश या सिफलिस (Syphilis) एक अत्यंत संक्रामक यौन-रोग हैं, जो मुख्य रुप से अधिकतर यौन क्रियाकलापों या लैंगिक सम्पर्क जैसे मुख मैथुन (Oral sex) या गुद्दा मैथुन (Anal Sex) द्वारा फैलता है। कभी-कभी यह संक्रमण, संक्रमित व्यक्ति से अंतरंग शरीरिक सम्पर्क बनाने से और कभी-कभी अंतरंग चुम्बन करने से भी हो जाता हैं। यद्यपि यह संक्रमण घाव से फैलता है परन्तु प्रायः संक्रमित व्यक्ति इस संक्रमण से अनभिज्ञ रहते हुंए, अनजानें में इस संक्रमण को अपने सहभोगी या सहभोगनी तक फैला देता है। गर्भवती महिलाये जो इस संक्रमण से संक्रमित हैं उनके बच्चे को जन्मजात उपदंश (Congenital Syphilis) होने की संभावना रहती है और इससे बच्चे के लिए कई प्रकार की विषमताये उत्पन्न हो सकती है या बच्चे की मृत्यु भी हो सकती हैं। उपदंश या सिफलिस टॉयलेट सीट, दरवाजा कि हेन्डल, स्विमिंग पूल, हॉट टब, नहाने के टब, साझा कपड़े, या खाने के बर्तन से नहीं फैल सकता हैं।
सिफलिस संक्रमण मुख्य रूप से ट्रीपोनीमा पैलिडम (Treponema pallidum) नाम के रोगाणु के कारण होता है और इस संक्रमण से संक्रमित होने पर रोगी के गुप्त अंगो जैसे शिश्न, योनि, गुद्दा, मलाशय और मुँह के आसपास छाले हो जाते है जिससे मैथुन किर्याओं व आलिंगन के समय इस संक्रमण का संचार एक सहभागी से दूसरे सहभागी में हो जाता है।
सिफलिस संक्रमण को चार चरणों में प्राथमिक चरण, माध्यमिक चरण, प्रछन्न या सुप्त चरण और तृतीयक या तिगुना चरण पाया जाता है जिसके अनुसार चिकित्सक रोगी का उपचार करते है।
प्राथमिक सिफलिस (Primary Syphilis):
किसी व्यक्ति के ट्रीपोनीमा पैलिडम (Treponema pallidum) बैक्टीरिया से संक्रमित होने के बाद सिफिलिस का प्राथमिक चरण लगभग तीन से चार सप्ताह तक होता है जो दर्द रहित पर बेहद संक्रामक एक छोटे छाले या नासूर, से शुरू होता है। शरीर के जिस भाग से बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है जैसे कि मुंह पर या अंदर, जननांगों, या मलाशय में या गले में यह छाले के रूप में दिखाई दे सकता है। यह छाले दो से छह हफ्तों तक रहते है।
माध्यमिक सिफलिस (Secondary Syphilis):
इस चरण में व्यक्ति को गले में खराश, हथेलियों में, पांव के तलों में लाल चकत्ते पड़ना या शरीर के किसी भी भाग पर चकत्ते पड़ना जिसपर अधिकतर लोग ध्यान नहीं देतें है और सर दर्द, लसिका ग्रंथियों में सूजन, अकारण थकान, जोड़ों में दर्द, बालों का झड़ना और भार का कम होना इत्यादि इसके अन्य लक्षण है । कुछ समय के बाद यह सब लक्षण लुप्त हो जाते है चाहे रोगी ने उपचार नहीं लिया हो।
प्रछन्न या सुप्त सिफलिस (Latent Syphilis):
सिफलिस का तीसरा चरण सुप्त या छिपा हुआ चरण है। इस समय सिफलिस के प्राथमिक और माध्यमिक लक्षण गायब हो जाते हैं, और इस चरण में कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते जबकि, इस समय बैक्टीरिया शरीर में ही रहता हैं जोकि तृतीयक सिफलिस की प्रगति से पहले कई वर्षों तक छिपा हुआ रह सकता है।
तृतीयक सिफलिस (Tertiary Syphilis):
संक्रमण के अंतिम चरण तृतीयक सिफलिस है।प्रारंभिक संक्रमण के बाद तृतीयक सिफलिस सालों या दशकों के बाद हो सकता हैं। तृतीयक सिफलिस जीवन के लिए खतरा बन सकता हैं। तृतीयक सिफलिस के कारण अंधापन, बहरापन, मानसिक बीमारी, स्मरण शक्ति की क्षति, नरम ऊतक और हड्डी का विनाश, स्नायविक विकार, जैसे स्ट्रोक या मेनिन्जाइटिस, दिल की बीमारी, न्यूरोसेफिलिस, जो मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी का संक्रमण है जैसे अन्य गंभीर परिणाम भी हो सकते है।
सिफलिस से कैसे बचे: सिफलिस से बचने का सीधा और साधारण उपाय है कि सुरक्षित यौन संबंध बनाए, एक से अधिक सहभागियों से यौन संबंध न बनाये, सुरक्षित कॉन्डोम का प्रयोग करें, टिका लगाने से पहले जांच ले कि सुई पहले प्रयोग नहीं की गई है। अप्राकृतिक यौन किर्यायों से बचें। अगर कभी भी इस संक्रमण से संक्रमित होने का संदेह हो तो किसी चिकित्सक से परामर्श करें।
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