केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Public Sector Unit) को एकीकृत सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सन 1968 में भारतीय संसद में एक अधिनियम संख्यां 50 को "THE CENTRAL INDUSTRIAL SECURITY FORCE" को पेश किया गया और 10 मार्च 1969 को केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) लगभग 2800 जवानों के साथ अस्तित्व में आ गया। उस समय तीन बटालियनों के साथ साधारण सी शुरूआत करके आज बहु-कौशल युक्त सुरक्षा एजेन्सी बन गया है और जिसके, सुरक्षा अधिकारी देश के अलग अलग क्षेत्रों में प्रमुख महत्वपूर्ण संस्थाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए, कठिन परिस्थितियों के बाबजूद अपनी सेवा के प्रति निष्ठावान है।
इस समय केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, परमाणु संयंत्रों, हवाई-अड्डों, समुद्रीपत्तनों, विद्युत संयत्रों, सरकारी भवनों तथा विरासत स्मारकों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है जबकि हाल ही में सौंपी गई महत्तवपूर्ण जिम्मेदारियों में वी.आई.पी. सुरक्षा, आपदा प्रबंधन तथा हैती में यू.एन. की फार्म्ड पुलिस यूनिट की स्थापना शामिल है। 25 फरवरी 2009 को भारतीय संसद ने सीआईएसएफ (संशोधन) विधेयक, 2008 को पारित कर देश भर में निजी और सहकारी प्रतिष्ठानों को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान अधिकृत कर दिया जिसके फलस्वरूप सीआईएसएफ ने 31 जुलाई 2009 को इनफ़ोसिस (Infosys, Bangalore), इन्फोसिस मैसूर, रिलायंस रिफाइनरी, जामनगर और दिल्ली मेट्रो एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन को भी सुरक्षा प्रदान कर दी, इसी अधिनयम के तहत विदेशों में भारतीय मिशनों की रक्षा और संयुक्त राष्ट्र शांति प्रबंधन कार्यों में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की उपस्थिति सम्भव हो पाई है। इस समय भारत में सीआईएसएफ में लगभग डेढ़ लाख जवान अपनी सेवाओं से विभिन्न संस्थाओं को सुरक्षा प्रदान कर रहे है और जल्द ही यह संख्या दो लाख हो जाएगी।

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