IPC 250 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 250

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 250

ऐसे सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है-- जो कोई किसी ऐसे सिक्के को कब्जे में रखते हुए, जिसके बारे में धारा 246 या 248 में परिभाषित अपराध किया गया हो, और जिसके बारे में उस समय, जब वह सिक्का उसके कब्जे में आया था, वह यह जानता था कि ऐसा अपराध उसके बारे में किया गया है, कपटपूर्वक या इस आशय से कि कपट किया जाए, किसी अन्य व्यक्ति को वह सिक्का परिदत्त करेगा, या किसी अन्य व्यक्ति को उसे लेने के लिए उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
ऐसे सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है पांच वर्ष का कारावास और जुर्मानासंज्ञेय या काग्निज़बलगैर-जमानती
विचारणीय : प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा यह अपराध कंपाउंडबल अपराधों की सूचि में सूचीबद्ध नहीं है

Indian Penal Code Section 250

Delivery of coin possessed with knowledge that it is altered.-- Whoever, having coin in his possession with respect to which the offence defined in section 246 or 248 has been committed, and having known at the time when he became possessed of such coin that such offence had been committed with respect to it, fraudulently or with intent that fraud may be committed, delivers such coin to any other person, or attempts to induce any other person to receive the same, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, and shall also be liable to fine.
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
Delivery of coin possessed with knowledge that it is altered.Imprisonment for Five years and FineCognizableNon-Bailable
Triable By: Magistrate First Class Offence is NOT listed under Compoundable Offences
बलात्कार एक घृणित अपराध
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