CrPC 437A in Hindi - दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा - 437क

अध्याय 33 - दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा - 437क - अभियुक्त को अगले अपील न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने की अपेक्षा के लिए जमानत।

1[(1). विचारण के समाप्त होने से पूर्व और अपील के निपटान से पूर्व, यथास्थिति, अपराध का विचारण करने वाला न्यायालय या अपील न्यायालय अभियुक्त से यह अपेक्षा कर सकेगा कि जब उच्चतर न्यायालय संबंधित न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध फाइल की गई किसी अपील या याचिका की बाबत सुचना जारी करे, तो वह उच्चतर न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए प्रतिभूति सहित जमानतपत्र निष्पादित करे और ऐसे बंधपत्र छह मास तक प्रभावी रहेंगे।

(2). यदि ऐसा अभियुक्त उपसंजात होने में असफल रहता है तो बंधपत्र समपहृत हो जाएगा और धारा 446 के अधीन प्रक्रिया लागू होगी। ]
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1. 2009 के अधिनियम सं.5 की धारा 31 द्वारा अंत:स्थापित।

Chapter XXXIII - CrPC Section 437A - Bail to require accused to appear before next appellate Court.


1[(1) Before conclusion of the trial and before disposal of the appeal, the Court trying the offence or the Appellate Court, as the case may be, shall require the accused to execute bail bonds with sureties, to appear before the higher Court as and when such Court issues notice in respect of any appeal or petition filed against the judgment of the respective Court and such bail bonds shall be in force for six months.

(2) If such accused fails to appear, the bond stand forfeited and the procedure under section 446 shall apply.]
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1. Ins. by Act 5 of 2009, s. 31 (w.e.f. 31-12-2009)

बलात्कार एक घृणित अपराध
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