IPC 73 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 73

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 73

एकांत परिरोध-- जब कभी कोई व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है जिसके लिए न्यायालय को इस संहिता के अधीन उसे कठिन कारावास से दंडादिष्ट करने की शक्ति है, तो न्यायालय अपने दंडादेश द्वारा आदेश दे सकेगा कि अपराधी को उस कारावास के, जिसके लिए वह दंडादिष्ट किया गया है, किसी भाग या भागों के लिए, जो कुल मिलाकर तीन मास से अधिक न होंगे, निम्न मापमान के अनुसार एकांत परिरोध में रखा जाएगा, अर्थात् :--
यदि कारावास की अवधि छह मास से अधिक न हो ते एक मास से अनधिक समय ;
यदि कारावास की अवधि छह मास से अधिक हो और [एक वर्ष से अधिक न हो] तो दो मास से अनधिक समय ;
यदि कारावास की अवधि एक वर्ष से अधिक हो तो तीन मास से अनधिक समय ।

Indian Penal Code Section 73

Solitary confinement.-- Whenever any person is convicted of an offence for which under this Code the Court has power to sentence him to rigorous imprisonment, the Court may, by its sentence, order that
the offender shall be kept in solitary confinement for any portion or portions of the imprisonment to which he is sentenced, not exceeding three months in the whole, according to the following scale, that is
to say--

a time not exceeding one month if the term of imprisonment shall not exceed six months:

a time not exceeding two months if the term of imprisonment shall exceed six months and [shall not exceed one] year:

a time not exceeding three months if the term of imprisonment shall exceed one year.
बलात्कार एक घृणित अपराध
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