IPC 119 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 119

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 119

किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है-- जो कोई लोक सेवक होते हुए उस अपराध का किया जाना, जिसका निवारण करना ऐसे लोक सेवक के नाते उसका कर्तव्य है, सुकर बनाने के आशय से या संभाव्यतः तद्द्द्वारा सुकर बनाएगा यह जानते हुए,

ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा स्वेच्छया छिपाएगा या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा व्यपदेशन करेगा जिसका मिथ्या होना वह जानता है,

यदि अपराध कर दिया जाए-- यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि के आधी तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या दोनों से,

यदि अपराध मॄत्यु आदि से दंडनीय है-- अथवा यदि वह अपराध मॄत्यु या 1[आजीवन कारावास] से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी,

यदि अपराध नहीं किया जाए-- अथवा यदि वह अपराध नहीं किया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

दृष्टांत:
क, एक पुलिस आफिसर, लूट किए जाने से संबंधित सब परिकल्पनाओं की, जो उसको ज्ञात हो जाए, इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए और यह जानते हुए कि लूट करने की परिकल्पना बना रहा है, उस अपराध के किए जाने को सुकर बनाने के आशय से ऐसी इत्तिला देने का लोप करता है । यहां ने की परिकल्पना के अस्तित्व को एक अवैध लोप द्वारा छिपाया है, और वह इस धारा के उपबंध के अनुसार दंडनीय है ।
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
1. किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है, यदि अपराध कर दिया गया|

2. यदि अपराध मॄत्यु या आजीवन कारावास आदि से दंडनीय है|

3. यदि अपराध नहीं किया जाए|
1. कारावास की दीर्घतम अवधि के आधी तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।

2. दस वर्ष तक का कारावास।

3. दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक या जुर्माना या दोनो.
कोंग्निजेंस - अपराध के अनुरसार 1. अपराध के अनुरसार

2. गैर-जमानती

3. अपराध के अनुरसार
विचारणीय - अपराध के अनुरसार कम्पाउंडबल अपराध की सूचि में सूचीबद्ध नहीं है।

Indian Penal Code Section 119

Public servant concealing design to commit offence which it is his duty to prevent.-- Whoever, being a public servant intending to facilitate or knowing it to be likely that he will thereby facilitate
the commission of an offence which it is his duty as such public servant to prevent, voluntarily conceals, by any act or illegal omission, the existence of a design to commit such offence, or makes any representation which he knows to be false respecting such design.

if offence be committed. if offence be committed.-- shall, if the offence be committed, be
punished with imprisonment of any description provided for the offence, for a term which may extend to one-half of the longest term of such imprisonment, or with such fine as is provided for that offence, or with both;

if offence be punishable with death, etc. if offence be punishable with death, etc.-- or, if the offence be punishable with death or [imprisonment for life], with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years;

if offence be not committed. if offence be not committed.-- or, if the offence be not committed, shall be punished with imprisonment of any description provided for the offence for a term which may extend to one- fourth part of the longest term of such imprisonment or with such fine as is provided for the offence, or with both.

Illustration:

A, an officer of police, being legally bound to give information of all designs to commit robbery which may come to his knowledge, and knowing that B designs to commit robbery, omits to give such information, with intent to facilitate the commission of that offence. here A has by an illegal omission concealed the existence of B's design and is liable to punishment according to the provision of this section.
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
1. A public servant concealing a design to commit an offence which it is his duty to prevent, If The offence be committed.
2. If the offence be punishable with death or imprisonment for life.
3. If the offence be not committed.
1. Half of Offence or Fine or Both

2. 10 Years.

3. One-Fourth of Offence or Fine or Both
Cognizance - Same As Offence1. Same As Offence.

2. Non-Bailable.

3. Same As Offence.
Triable By - Same As OffenceOffence is NOT listed under Compoundable Offences
बलात्कार एक घृणित अपराध
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