IPC 491 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 491

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 491

असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग-- जो कोई ऐसे व्यक्ति की, जो किशोरावस्था या चित्तविकृति या रोग या शारीरिक दुर्बलता के कारण असहाय है, या अपने निजी क्षेम की व्यवस्था या अपनी निजी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए असमर्थ है, परिचर्या करने के लिए या उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए विधिपूर्ण संविदा द्वारा आबद्ध होते हुए, स्वेच्छया ऐसा करने का लोप करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंगतीन माह का कारावास या जुर्माना या दोनों असंज्ञेय या नॉन-काग्निज़बलजमानती
विचारणीय :किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा यह अपराध कंपाउंडबल है

Indian Penal Code Section 491

Breach of contract to attend on and supply wants of helpless person.-- Whoever, being bound by a lawful contract to attend on or to supply the wants of any person who, by reason of youth, or of unsoundness of mind, or of a disease or bodily weakness, is helpless or incapable of providing for his own safety or of supplying his own wants, voluntarily omits so to do, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three months, or with fine which may extend to two hundred rupees, or with both.
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
Breach of contract to attend on and supply wants of helpless person.Imprisonment for Three Months or Fine or BothNon-CognizableBailable
Triable By: Any Magistrate Offence is Compoundable.

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