IPC 304 in Hindi - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304

हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध के लिए दण्ड-- जो कोई ऐसा आपराधिक मानव वध करेगा, जो हत्या की कोटि में नहीं आता है, यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृत्यु कारित की गई है, मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति, जिससे मृत्यु होना संभाव्य हैं, कारित करने के आशय से किया जाए, तो वह [आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा ओर जुर्माने से भी दंडनीय होगा;
अथवा यदि वह कार्य इस ज्ञान के साथ कि उससे मृत्यु कारित करना संभाव्य है, किन्तु मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति, जिससे मृत्यु कारित करना संभाव्य है, कारित करने के किसी आशय के बिना  किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने  से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
1. हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध के लिए दण्ड.

2. यदि वह कार्य इस ज्ञान के साथ कि उससे मृत्यु कारित करना संभाव्य है, किन्तु मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति, जिससे मृत्यु कारित करना संभाव्य है, कारित करने के किसी आशय के बिना  किया जाए
1. उम्र कैद या दस वर्ष तक का कारावास और जुर्माना।

2. दस वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। 
संज्ञेय या काग्निज़बलगैर-जमानती
विचारणीय : सेशन कोर्ट द्वारा कंपाउंडबल अपराध के सूचि में सूचीबद्ध नहीं है।

Indian Penal Code Section 304

Punishment for culpable homicide not amounting to murder.-- Whoever commits culpable homicide not amounting to murder shall be punished with [imprisonment for life], or imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine, if the act by which the death is caused is done with the intention of causing death. or of causing such bodily injury as is likely to cause death;
or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, or with fine, or with both, if the act is done with the knowledge that it is likely to cause death, but without any intention to cause death, or to cause such bodily injury as is likely to cause death.
PUNISHMENT & CLASSIFICATION OF OFFENCE
1. Punishment for culpable homicide not amounting to murder.

2. if the act is done with the knowledge that it is likely to cause death, but without any intention to cause death etc.
1. Imprisonment for Life or Imprisonment may extend to ten years and fine.

2. Imprisonment may extend to ten or Fine or Both.
CognizableNon-Bailable
Triable By: Court of Session Offence is NOT listed under Compoundable Offences
यदि कोई, ऐसा कार्य, जिससे किसी की मृत्यु का होने का या ऐसी शारीरिक हानि होने से मृत्यु होने का उसे ज्ञान है और इस जानकारी के साथ वह ऐसा कार्य करने की इच्छा न रखते हुए मानव वध करता है (जो धारा 300 "हत्या" की परिभाषा में नहीं आता है) तो वह दोषी सिद्ध होने पर दस वर्ष तक के कारावास से या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
संज्ञेय अपराध होने के कारण पुलिस इसपर तुरंत संज्ञान ले कर आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और इस धारा के गैर-जमानती होने के कारण इस मामले में तुरंत जमानत नहीं मिलती है।
कृपया ध्यान दे : इस धारा की प्रकृति को समझने के लिए इससे सम्बन्धित धारा 299 को जान लें "धारा 299 "आपराधिक मानव वध" पढ़ें।
आई.पी.सी. की धारा 304 का मामला जो सुर्खियों में रहा :
1. 21 सितम्बर 2017 दिल्ली के सभी समाचार पत्रों में एक समाचार सुर्ख़ियों में था जिसे पढ़ने के बाद दिल्ली में लोगों की धैर्य शक्ति पर चिन्ह लग गया। एक फोटोग्राफी स्कुल के दो छात्र मनिंदर और गुरप्रीत एक डॉक्युमेंट्री के लिए लोकेशन की तलाश में एम्स और सफदरजंग अस्पताल आए थे वहां नशे में चूर एक व्यक्ति ने दोनों छात्रों पर सिगरेट का धुआं उड़ाया इस पर दोनों युवकों के आपत्ति जताने पर उस व्यकित ने दोनों छात्रों से झगड़ा किया। कहासुनी को बढ़ता देख, जब दोनों छात्र बाइक से वापस लौटने लगे तो उस व्यक्ति ने अपनी फोर्ड कार से उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर की वजह से गुरप्रीत सिंह गंभीर रूप से घाय़ल हो गया और दो दिनों के बाद उसने दम तोड़ दिया। इस घटना का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने आई.पी.सी की धारा 304 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया।
ध्यान दें: यहाँ पर ऊपर दिया गया उदाहरण केवल भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और किए गए अपराधों के तालमेल को समझने के लिए दिया गया है और इसी लिए उदाहरण को चर्चित समाचार के माध्यम से बताने की चेष्ठा की गई है। साक्ष्य के रूप में उन समाचारों के लिंक को उपर प्रस्तुत किया गया है जो उदाहरण के लिए प्रयोग किए गए है। अतः यह उदाहरण मन गढ़ंत नहीं है। NEWS

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