Indian Penal Code Section 208 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 208

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 208

ऐसी राशि के लिए जो शोध्य न हो कपटपूर्वक डिक्री होने देना सेहन करना -- जो कोई किसी व्यक्ति के बाद में ऐसी राशि के लिए जो ऐसे व्यक्ति को शोध्य न हो या शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी ऐसी सम्पति का सम्पति के हित के लिए, जिसका ऐसा व्यक्ति हकदार न हो, अपने विरूद्ध कोई डिक्री या आदेश कपटपूर्वक पारित करवायेगा, या पारित किया जाना सेहन करेगा अथवा किसी डिक्री या आदेश को उस के तुष्ट किये जाने के पशचात या किसी ऐसे बात के लिए, जिस के विषय में उस डिक्री या आदेश की तुष्टी कर दी गयी हो, आपने विरूद्ध कपटपूर्वक निष्पादित करवाएगा या किया जाना सहन करेगा वह दोनों में से किसी भी प्रकार की कारावास जिसकी अवधि 2 वर्ष तक हो सकेंगी या जुर्माने या दोनों से दंडनीय होगा
दृष्टांत:
य जो एक व्यक्ति है उस के खिलाफ क जो दूसरा व्यक्ति है एक वाद सस्थित करता है, य यह सम्भाव्य जानते हुए की क उस के विरुद्ध डिक्री अभिप्राप्त कर लेगा, ख के बाद में, जिस के विरूद्ध कोई न्यायसंगत दावा नहीं है, अधिक रकम के लिए अपने विरूद्ध निर्णय किया जाना इस लिए कपटपूर्वक सेहन करता है क्यों की ख स्वय के लिए या य के फायदे के लिए य की सम्पति के किसी ऐसे विक्रय के आवमो का आंश ग्रहण करे जो क के डिक्री के आधीन किया जाये तो य ने इस धारा के अन्दर अपराध किया है

CLASSIFICATION OF OFFENCE
ऐसी राशि के लिए जो शोध्य न हो कपटपूर्वक डिक्री होने देना सेहन करनादो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों असंज्ञेय या नॉन-काग्निज़बलजमानती
विचारणीय : प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट द्वारा कंपाउंडबल अपराध की सुचि में सूचीबद्ध नहीं है।

Indian Penal Code Section 208

Fraudulently suffering decree for sum not due.-- Whoever fraudulently causes or suffers a decree or order to be passed against him at the suit of any person for a sum not due or for a larger sum than is due to such person or for any property or interest in property to which such person is not entitled, or fraudulently causes or suffers a decree or order to be executed against him after it has been satisfied, or for anything in respect of which it has been satisfied, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

Illustration:
A institutes a suit against Z. Z, knowing that A is likely to obtain a decree against him, fraudulently suffers a judgment to pass against him for a larger amount at the suit of B, who has no just claim against him, in order that B, either on his own account or for the benefit of Z, may share in the proceeds of any sale of Z's property which may be made under A's decree. Z has committed an offence under this section.

CLASSIFICATION OF OFFENCE
Fraudulently suffering decree for sum not due.imprisonment may extend to two years or fine or bothNon-CognizableBailable
Triable by: Magistrate First Class Offence is NOT listed under Compoundable Offences






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