IPC 338 - News - आईपीसी की धारा 338 - समाचार

IPC 338 - News - आईपीसी की धारा 338 - समाचार

Section 338 IPC : किसी लापरवाही या दुःसाहसपूर्ण कारण से किसी के जीवन को या व्यक्तिगत रूप से गम्भीर शारीरिक हानि या क्षति पहुंचाने पर आईपीसी की धारा 338 के तहत मामला दर्ज हो सकता है।
वाहन दुर्घटना में जब किसी को गम्भीर शारीरिक हानि पहुँचती है तो अधिकतर यह धारा प्रयोग में लाई जाती है। आईपीसी की यह धारा संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती है अथार्त पुलिस सुचना मिलने पर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है और क्योकि यह धारा जमानती है तो जमानत भी तुरंत ली जा सकती है।
हमारा उद्देश्य किसी दुर्घटना या उपेक्षापूर्ण कार्य से गम्भीर शारीरिक या जीवन को क्षति के मामलों से संबंधित समाचरों को प्रस्तुत कर उन घटनाओं को बताना है, जिनमे आईपीसी की धारा 338 का प्रयोग होता है। इन समाचरों को हमने कुछ प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइटों से लिया है जिनका हम तह दिल से आभार प्रकट करते है।

कार से ऑटो रिक्शा को टक्कर मारने के आरोप में आदित्य नारायण गिरफ्तार, विवादों से है पुराना नाता।

टाइम्स नाउ डिजिटल | Updated: Mar 13, 2018 | 08:13 IST

मुंबई: मशहूर सिंगर उदित नारायण के बेटे और बॉलीवुड एक्टर व सिंगर आदित्य नारायण को मुंबई पुलिस ने सोमवार को कथित तौर पर अपनी कार से एक ऑटो रिक्शा को टक्कर मारने के आरोप में गिरफ्तार किया। इस हादसे में रिक्शा ड्राइवर और महिला पैसेंजर घायल हो गए। न्यूज एजेंसी एएनआई ने ट्वीट किया, अंधेरी के लोखंडवाला इलाके में ऑटो रिक्शा को टक्कर मारने के आरोप में वार्सोवा पुलिस ने सिंगर आदित्य नारायण को आईपीसी की धारा 338 और 279 के तहत गिरफ्तार किया। इस हादसे में रिक्शा ड्राइवर और पैसेंजर घायल हो गए। हालांकि 10 हजार के जुर्माने लेकर उन्हें जमानत दे दी गई। (पूरा पढ़े स्त्रोत: Times Now News)

खान दुर्घटना तीन लोगों पर थाना ने दर्ज किया मामला

हिन्दुस्तान टीम, रामगढ़ | Updated: Mon, 19 Mar 2018 01:24 AM IST

उरीमारी भूगर्भ खान में शनिवार को हुई दुर्घटना मामले में उरीमारी थाना कीओर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया गया है। ओपी प्रभारी परमानंद कुमार मेहरा ने बताया कि दुर्घटना के मामले में चौकीदार रामचरण बेदिया की फर्द बयान पर आईपीसी की धारा 288, 337, 338 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में खान मैनेजर, शिफ्ट के ओवरमैन और माइनिंग सरदार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके पूर्व सयाल के 10 नंबर खान में हुई दुर्घटना में भी मामला दर्ज किया गया था।पूरा पढ़े (स्त्रोत: Live Hindustan)

पेट में तौलिया छोड़ा, फिर इलाज भी नहीं किया

नवभारत टाइम्स | Updated: Mar 9, 2018, 08:15AM IST

नई दिल्ली
दिल्ली के कल्याणपुरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री (एलबीएस) हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर आरोप है कि उन्होंने एक ऑपरेशन के दौरान एक महिला के पेट में तौलिया छोड़ दिया। एक साल से भी ज्यादा वक्त से महिला के पेट में तौलिया था। वह बार-बार इलाज के लिए हॉस्पिटल जाती रहीं, लेकिन डॉक्टरों ने उनका इलाज नहीं किया। डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से उन्हें लगातार असहनीय दर्द भी झेलना पड़ा।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आईपीसी की धारा-338 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अभी तक पुलिस ने इस मामले में किसी को अरेस्ट नहीं किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कुछ दिन पहले ही शिकायत मिली थी। शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। जांच में जिसकी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। पूरा पढ़े (स्त्रोत: नवभारत टाइम्स)

IPC 337 - News - आईपीसी की धारा 337 - समाचार

IPC 337 - News - आईपीसी की धारा 337 - समाचार

Section 337 IPC : किसी लापरवाही या दुःसाहसपूर्ण कारण से किसी के जीवन को या व्यक्तिगत रूप से शारीरिक हानि या क्षति पहुंचाने पर आईपीसी की धारा 337 के तहत मामला दर्ज हो सकता है।
वाहन दुर्घटना में जब किसी को शारीरिक हानि पहुँचती है तो अधिकतर इस धारा का प्रयोग होता है। आईपीसी की यह धारा संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती है अथार्त पुलिस सुचना मिलने पर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है और क्योकि यह धारा जमानती है तो जमानत भी तुरंत ली जा सकती है।
दुर्घटना या किसी उपेक्षापूर्ण कार्य से शारीरिक या जीवन को क्षति के मामलों से संबंधित समाचरों को प्रस्तुत कर उन घटनाओं को बताना है, जिनमे आईपीसी की धारा 337 का प्रयोग होता है। इन समाचरों को हमने कुछ प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइटों से लिया है जिनका हम तह दिल से आभार प्रकट करते है।

एलिवेटेड हाइवे से गिरे एक और मजदूर की मौत

नवभारत टाइम्स | Updated: Mar 9, 2018, 09:00AM IST

एनबीटी न्यूज, पानीपत: पानीपत में एलिवेटेड हाइवे से जीटी रोड पर गिर कर गंभीर रूप घायल हुए श्रमिक अर्जुन (35) की गुरुवार को पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस तरह हादसे में मरने वाले श्रमिकों की संख्या दो हो गई है। जबकि हादसे में घायल तीसरे श्रमिक अशोक (35) का पीजीआई में उपचार चल रहा है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, बुधवार को मृत हुए मजदूर की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
सिटी थाना पुलिस ने घटना के चश्मदीद निरंजन की शिकायत पर ट्रैक्टर-ट्रॉली के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 336, 337, 338, 304-ए, 114 के तहत केस दर्ज किया है। (पूरा पढ़े स्त्रोत: नवभारत टाइम्स)

एलिवेटेड हाइवे से गिरे एक और मजदूर की मौत

ABP NEWS | Updated: 13 Mar 2018 08:06 AM

नई दिल्ली: मुखर्जी नगर इलाके में हुए एक हादसे में दो छात्रों की मौत हो गई और तीन छात्राएं घायल हो गईं. बताया जा रहा है कि गाड़ी में सवार सभी छात्र-छात्राएं नशे में थे और एक कॉलेज फेस्ट से वापस लौट रहे थे. रात पौने तीन का वक्त था और गाड़ी की स्पीड 120 से ज्यादा थी. अचानक बैलेंस बिगड़ा और गाड़ी डिवाइडर से टकरा कर पलट गई.
पुलिस ने कार से शराब की बोतल भी बरामद की है. इस मामले में दीक्षा के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 337 और 304-ए के तहत मामला दर्ज किया गया है. जांच में पता चला है कि दीक्षा के पास लर्निंग लाइसेंस था जिसकी मियाद खत्म हो चुकी थी.पूरा पढ़े (स्त्रोत: ABP NEWS)

सड़क हादसे में हुई थी महिला की मौत, आरोपी को दो साल की सजा

ABP NEWS | Updated: Mar 13, 2018, 02:10 AM IST

पिछले साल सड़क हादसे में एक महिला की मौत हो गई थी। अब एक साल बाद इस केस में जिला अदालत ने आरोपी कार चालक को दो साल की सजा सुनाई है। दोषी सेक्टर-30 निवासी नवीन यादव पर कोर्ट ने 5500 रुपए जुर्माना भी लगाया है।
एक साल बाद फैसला
19 अप्रैल 2017 के इस हादसे में सेक्टर-30 के ही रहने वाले राम निवास रंभा के साथ मोटरसाइकिल पर अपने घर जा रहे थे। रात करीब 10.40 बजे जब वे सेक्टर-19-20 डिवाइडिंग रोड पर पहुंचे तभी एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इसके बाद दोनों बाइक से गिर गए और हादसे में बुरी तरह से घायल हो गए थे। उन्हें सेक्टर-32 के अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां से उनको पीजीआई रेफर कर दिया गया था। यहां पर इलाज के दौरान रामनिवास की प|ी रंभा की मौत हो गई थी। आरोप के मुताबिक कार चालक नवीन यादव बड़ी ही लापरवाही से ड्राइविंग कर रहा था जिस कारण ये हादसा हुआ। पुलिस ने शुरूआत में इस केस में आईपीसी की धारा 337 के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन बाद में आरोपी पर धारा 304 भी लगा दी। पूरा पढ़े (स्त्रोत: दैनिक भास्कर)

छेड़छाड़ - IPC 354 - News - आईपीसी की धारा 354 - समाचार

छेड़छाड़ - IPC 354 - News - आईपीसी की धारा 354 - समाचार

महिला से छेड़छाड़ के मामले में लगती है आईपीसी की धारा 354
भारतीय दंड संहितां की धारा 354 में आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013 के द्वारा छेड़छाड़ के मामले में दंड के रूप में कारावास को कम से कम एक वर्ष से पांच वर्ष तक का कर दिया गया है और जुर्माना भी देना होगा। इस धारा के अंतर्गत किसी महिला से छेड़छाड़ करने पर या उसके मान समान को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से उसपर आपराधिक बल का प्रयोग करने पर आरोपी पर मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके साथ अन्य धाराएं जैसे 354A, 354B, 354C, 354D भी अपराध की गम्भीरता और उद्देश्य के अनुसार नारी व् यौन उत्पीड़न के मामलों के लिए प्रस्तुत की गई है।

छेड़छाड़ के मामलों समाचार Section 354 ipc:

गोरखपुर: महिला कोच में घुसकर कर छेड़खानी करते 11 बदमाश गिरफ्तार

Updated: March 10, 2018, 10:08 AM IST

महिला कोच में जबरन घुसकर महिलाओं से छेड़खानी करने वाले 11 बदमाशों को गोरखपुर जीआरपी ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ट्रेनों में सफर करने वाली महिलाओं और लड़कियों के साथ ये मनचलें रोजाना छेड़छाड़ करते थे। पुलिस को इन लोगों के खिलाफ काफी दिनों से शिकायत मिल रही थी. इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने अभियान चलाकर इन बदमाशों को पकड़ा। समाचार मिलने तक जीआरपी इन बदमाशों से पूछताछ कर रही थी। पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया है। (स्त्रोत: न्यूज 18 हिंदी)

एक्‍टर जीतेंद्र पर दर्ज हुआ यौन शोषण का केस, ट्विटर पर हैरानी जता रहे लोग

March 7, 2018 16:30 pm, जनसत्ता ऑनलाइन

बॉलीवुड के मशहूर एक्टर जीतेंद्र के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के तहत हिमाचल प्रदेश के न्यू शिमला में यौन शोषण का केस दर्ज हुआ है। पीड़िता ने पुलिस शिकायत में बताया कि जनवरी, 1971 में जीतेंद्र ने उनका यौन उत्पीड़न किया। चौंकाने वाली बात यह है कि जीतेंद्र के खिलाफ यह गंभीर आरोप उनकी कजिन ने ही लगाया है। पीड़िता का कहना है कि जब वह 18 साल की थी, तब जीतेंद्र ने ऐसा किया था। पीड़िता के मुताबिक, उस वक्त जीतेंद्र की उम्र 28 साल थी। वहीं, बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर के खिलाफ केस दर्ज होने की खबर सामने आने पर ट्विटर यूजर्स भी खासे हैरान हैं। कई यूजर्स ने शिकायतकर्ता पर ही सवाल उठा दिए हैं। (स्त्रोत: जनसत्ता ऑनलाइन)

आइसर के प्रोफेसर पर गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा ने लगाया छेड़छाड़ का आरोप, केस दर्ज

Mar 12, 2018, 04:15 AM IST, Bhaskar News Network

राजधानी के खजूरी सड़क थाना क्षेत्र स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) के प्रोफेसर पर दिल्ली की एक छात्रा ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। कॉलेज में गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी छात्रा ने प्रोफेसर की टिप्पणियों से परेशान होकर आईआईएसईआर से पीएचडी छोड़ दी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई शिकायत के बाद खजूरी सड़क पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के तहत छेड़छाड़ का केस दर्ज किया है। (स्त्रोत: Bhaskar News Network)
हमारा उद्देश्य समाज में होने वाले छेड़छाड़ के मामलों से संबंधित समाचरों को प्रस्तुत कर उन घटनाओं को बताना है, जिनमे आईपीसी की धारा 354 का प्रयोग होता है। इन समाचरों को हमने कुछ प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइटों से लिया है जिनका हम तह दिल से आभार प्रकट करते है।

The Constitution of India Article 25 - अनुच्छेद 25

The Constitution of India Article 25 - अनुच्छेद 25

अनुच्छेद 25 अंत—करण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता।--

(1) लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अंत—करण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा।
(2) इस अनुच्छेद की कोई बात किसी ऐसी विद्यमान विधि के प्रवतर्न पर प्रभाव नहीं डालेगी या राज्य को कोई ऐसी विधि बनाने से निवारित नहीं करेगी जो—
(क) धार्मिक आचरण से संबद्ध किसी आर्थिक, वित्तीय, राजनैतिक या अन्य लौकिक क्रियाकलाप का विनियमन या निर्बन्धन करती है ;
(ख) सामाजिक कल्याण और सुधार के लिए या सार्वजनिक प्रकार की हिंदुओं की धार्मिक संस्थाओं को हिंदुओं के सभी वर्गों अौर अनुभागों के लिए खोलने का उपबंध करती है।
स्पष्टीकरण 1— कृपाण धारण करना और लेकर चलना सिक्ख धर्म के मानने का अंग समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण 2- खंड (2) के उपखंड (ख) में हिंदुओं के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत सिक्ख, जैन या बौद्ध धर्म के मानने वाले व्यक्तियों के प्रति निर्देश है और हिंदुओं की धार्मिक संस्थाओं के प्रति निर्देश का अर्थ तदनुसार लगाया जाएगा।

Article 25 of The Constitution Of India 1949.—

Freedom of conscience and free profession, practice and propagation of religion.
(1) Subject to public order, morality and health and to the other provisions of this Part, all persons are equally entitled to freedom of conscience and the right freely to profess, practise and propagate religion.
(2) Nothing in this article shall affect the operation of any existing law or prevent the State from making any law.
(a) regulating or restricting any economic, financial, political or other secular activity which may be associated with religious practice;
(b) providing for social welfare and reform or the throwing open of Hindu religious institutions of a public character to all classes and sections of Hindus.
Explanation I The wearing and carrying of kirpans shall be deemed to be included in the profession of the Sikh religion.
Explanation II In sub clause (b) of clause reference to Hindus shall be construed as including a reference to persons professing the Sikh, Jaina or Buddhist religion, and the reference to Hindu religious institutions shall be construed accordingly.

1400 साल पुराना तलाक-ए-बिद्दत (Triple Talaq) रद्द हुआ - Judgement

1400 साल पुराना तलाक-ए-बिद्दत (Triple Talaq) रद्द हुआ - Judgement

शायरा बानो (Shayara Bano), मुस्लिम विमेंस क्वेस्ट फॉर इक्वलिटी (Muslim Women’s Quest For Equality), आफरीन रेहमान (Aafreen Rehman), गुलशन परवीन (Gulshan Parveen), इशरत जहां (Ishrat Jahan) और अतिया साबरी (Atiya Sabri) द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद पाँच जजों की एक संविधान पीठ ने 3:2 के बहुमत से एक ऐतिहासिक निर्णय द्वारा 22 अगस्त 2017 को मुस्लिम समाज में 1400 वर्षो से प्रचलित तलाक-ए-बिद्दत (Talaq e Biddat) या ट्रिपल तलाक (Triple Talaq) को रद्द कर दिया। जबकि इससे पहले सन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: ही मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला आदि का संज्ञान लेते हुए मामले को जनहित याचिका में परिवर्तित कर दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि तीन तलाक स्पष्ट रूप से मनमाना है, क्योंकि यह मुस्लिम पुरुष को वैवाहिक संबंध को बचाने का प्रयास किए बिना संबंध विछेद की अनुमति देता है। लिहाजा संविधान के अनुच्छेद-25 यानी धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अनुसार इस प्रथा को संरक्षण नहीं दिया जा सकता और यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
गौरतलब है कि पांच जजों के संविधान पीठ के सदस्य अलग-अलग धर्म के हैं। चीफ जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने यह कहते हुएँ कि 1400 वर्षों से चली आ रही प्रथा अब धर्म का हिस्सा बन गई है इसलिए ट्रिपल तलाक अनुच्छेद-25 का अहम हिस्सा है, वहीं जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन, जस्टिस कूरियन जोसफ और जस्टिस यूयू ललित ने जहां तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है।
विस्तृत जानकारी के लिए निर्णय पूरा पढ़ें: :

Code Of Criminal Procedure Section - 468

Code Of Criminal Procedure Section - 468

1CHAPTER XXXVI - CrPC Section 468 - Bar to taking cognizance after lapse of the period of limitation.—-

(1) Except as otherwise provided elsewhere in this Code, no Court shall take cognizance of an offence of the category specified in sub-section (2), after the expiry of the period of limitation.
(2) The period of limitation shall be—
(a) six months, if the offence is punishable with fine only;
(b) one year, if the offence is punishable with imprisonment for a term not exceeding one year;
(c) three years, if the offence is punishable with imprisonment for a term exceeding one year but not exceeding three years.
2[(3) For the purposes of this section, the period of limitation, in relation to offences which may be tried together, shall be determined with reference to the offence which is punishable with the more severe punishment or, as the case may be, the most severe punishment.]
__________
1. Provisions of this Chapter shall not apply to certain economic offences, see the Economic Offences (Inapplicability of Limitation) Act, 1974 (12 of 1974), s. 2 and Sch.
2. Ins. by Act 45 of 1978, s. 33 (w.e.f. 18.12.1978).
हिंदी में पढ़ें

दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 468

दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 468

1अध्याय 36 - दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा 468 - परिसीमा-काल की समाप्ति के पश्चात संज्ञान का वर्जन--

(1). इस संहिता में अन्यत्र जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई न्यायालय उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट प्रवर्ग के किसी अपराध का संज्ञान परिसीमा-काल की समाप्ति के पश्चात नहीं करेगा।
(2). परिसीमा-काल,--
(क) छह मॉस होगा, यदि अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय है;
(ख) एक वर्ष होगा, यदि अपराध एक वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय है;
(ग) तीन वर्ष होगा, यदि अपराध एक वर्ष से अधिक किन्तु तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय है।
2[(3). इस धारा के प्रयोजनों के लिए उन अपराधों के संबंध में, जिनका एक साथ विचारण किया जा सकता है, परिसीमा-काल उस अपराध के अपराध के प्रतिनिर्देश से अवधारित किया जाएगा जो, यथास्थिति, कठोरतर दंड से दंडनीय है।]
__________
1. इस अध्याय के उपबंध कतिपय अपराधों को लागू नहीं होंगे, देखिए आर्थिक अपराध (परिसीमा का लागू न होना) अधिनियम, 1974 (1974 का 12) की धारा 2 और अनुसूची।
2. 1978 के अधिनियम संख्यां 45 की धारा 33 द्वारा अंत:स्थापित।
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