Indian Penal Code Section 95 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 95 - Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 95

तुच्छ अपहानि कारित करने वाला कार्य-- कोई बात इस कारण से अपराध नहीं है कि उससे कोई अपहानि कारित होती है या कारित की जानी आशयित है या कारित होने की संभाव्यता ज्ञात है, यदि वह इतनी तुच्छ है कि मामूली समझ और स्वभाव वाला कोई व्यक्ति उसकी शिकायत न करेगा ।



Indian Penal Code Section 95

Act causing slight harm.-- Nothing is an offence by reason that it causes, or that it is intended to cause, or that it is known to be likely to cause, any harm, if that harm is so slight that no person of ordinary sense and temper would complain of such harm.






Indian Penal Code Section 94 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 94 - Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 94

वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है-- हत्या और मॄत्यु से दंडनीय उन अपराधों को जो राज्य के विरुद्ध है, छोड़कर कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए ऐसी धमकियों से विवश किया गया हो जिनसे उस बात को करते समय उसको युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो गई हो कि अन्यथा परिणाम यह होगा कि उस व्यक्ति की तत्काल मॄत्यु हो जाए, परन्तु यह तब जबकि उस कार्य को करने वाले व्यक्ति ने अपनी ही इच्छा से या तत्काल मॄत्यु से कम अपनी अपहानि की युक्तियुक्त आशंका से अपने को उस स्थिति में न डाला हो, जिसमें कि वह ऐसी मजबूरी के अधीन पड़ गया है ।

स्पष्टीकरण 1-- वह व्यक्ति, जो स्वयं अपनी इच्छा से, या पीटे जाने की धमकी के कारण, डाकुओं की टोली में उनके शील को जानते हुए सम्मिलित हो जाता है, इस आधार पर ही इस अपवाद का फायदा उठाने का हकदार नहीं कि वह अपने साथियों द्वारा ऐसी बात करने के लिए विवश किया गया था जो विधिना अपराध है ।

स्पष्टीकरण 2-- डाकुओं की एक टोली द्वारा अभिगॄहीत और तत्काल मॄत्यु धमकी द्वारा किसी बात के करने के लिए, जो विधिना अपराध है, विवश किया गया व्यक्ति, उदाहरणार्थ, एक लोहार, जो अपने औजार लेकर एक गॄह का द्वारा तोड़ने को विवश किया जाता है, जिससे डाकू उसमें प्रवेश कर सकें और उसे लूट सकें, इस अपवाद का फायदा उठाने के लिए हकदार है ।



Indian Penal Code Section 94

Act to which a person is compelled by threats.-- Except murder, and offences against the State punishable with death, nothing is an offence which is done by a person who is compelled to do it by threats, which, at the time of doing it, reasonnably cause the apprehension that instant death to that person will otherwise be the consequence: Provided the person doing the act did not of his own accord, or from a reasonable apprehension of harm to himself short of instant death, place himself in the situation by which he became subject to such constraint.

Explanation 1.- A person who, of his own accord, or by reason of a threat of being beaten, joins a gang of dacoits, knowing their character, is not entitled to the benefit of this exception, on the ground of his having been compelled by his associates to do anything that is an offence by law.

Explantion 2.- A person seized by a gang of dacoits, and forced, by threat of instant death, to do a thing which is an offence by law; for example, a smith compelled to take his tools and to force the door of a house for the dacoits to enter and plunder it, is entitled to the benefit of this exception.






Indian Penal Code Section 93 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 93 - Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 93

सदभावपूर्वक दी गई संसूचना -- सदभावपूर्वक दी गई संसूचना उस अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस व्यक्ति की हो जिसे वह दी गई है, यदि वह उस व्यक्ति के फायदे के लिए दी गई हो ।

दृष्टांत:
क, एक शल्यचिकित्सक, एक रोगी को सदभावपूर्वक यह संसूचित करता है कि उसकी राय में वह जीवित नहीं रह सकता । इस आघात के परिणामस्वरूप उस रोगी की मॄत्यु हो जाती है । ने कोई अपराध नहीं किया है, यद्यपि वह जानता था कि उस संसूचना से उस रोगी की मॄत्यु कारित होना संभाव्य है ।



Indian Penal Code Section 93

Communication made in good faith.-- No communication made in good faith is an offence by reason of any harm to the person to whom it is made, if it is made for the benefit of that person.

Illustration :

A, a surgeon, in good faith, communicates to a patient his opinion that he cannot live. The patient dies in consequence of the shock. A has committed no offence, though he knew it to be likely that the communication might cause the patient's death.






Indian Penal Code Section 92 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 92 - Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 92

सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सदभावपूर्वक किया गया कार्य -- कोई बात जो किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सदभावपूर्वक यद्यपि, उसकी सम्मति के बिना, की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण, जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो जाए, अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए यह अंसभव हो कि वह अपनी सम्मति प्रकट करे या वह व्यक्ति सम्मति देने के लिए असमर्थ हो और उसका कोई संरक्षक या उसका विधिपूर्ण भारसाधक को दूसरा व्यक्ति न हो जिससे ऐसे समय पर सम्मति अभिप्राप्त करना संभव हो कि वह बात फायदे के साथ की जा सके :
परन्तुक--परन्तु--

पहला-- इस अपवाद का विस्तार साशय मॄत्यु कारित करने या मॄत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;

दूसरा-- इस अपवाद का विस्तार मॄत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर न होगा, जिसे करने वाला व्यक्ति जानता हो कि उससे मॄत्यु कारित होना संभाव्य है ;

तीसरा-- इस अपवाद का विस्तार मॄत्यु या उपहति के निवारण के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करने या उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;

चौथा-- इस अपवाद का विस्तार किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर न होगा जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं है ।

दृष्टांत
(क) य अपने घोड़े से गिर गया और मूर्छित हो गया । एक शल्यचिकित्सक का यह विचार है कि के कपाल पर शल्यव्रिEया आवश्यक है । क, य की मॄत्यु करने का आशय न रखते हुए, किंतु सदभावपूर्वक के फायदे के लिए, के स्वयं किसी निर्णय पर पहुंचने की शक्ति प्राप्त करने से पूर्व ही कपाल पर शल्यव्रिEया करता है । ने कोई अपराध नहीं किया ।

(ख) य को एक बाघ उठा ले जाता है । यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गोली लगने से मर जाए, किंतु का वध करने का आशय न रखते हुए और सदभावपूर्वक के फायदे के आशय से उस बाघ पर गोली चलाता है । की गोली से को मॄत्युकारक घाव हो जाता है । ने कोई अपराध नहीं किया ।

(ग) क, एक शल्यचिकित्सक, यह देखता है कि एक शिशु की ऐसी दुर्घटना हो गई है जिसका प्राणांतक साबित होना संभाव्य है, यदि शस्त्रकर्म तुरंत न कर दिया जाए । इतना समय नहीं है कि उस शिशु के संरक्षक से आवेदन किया जा सके । क, सदभावपूर्वक शिशु के फायदे का आशय रखते हुए शिशु के अन्यथा अनुनय करने पर भी शस्त्रकर्म करता है । ने कोई अपराध नहीं किया ।

(घ) एक शिशु के साथ एक जलते हुए गॄह में है । गॄह के नीचे लोग एक कंबल तान लेते है । उस शिशु को यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गिरने से वह शिशु मर जाए किंतु उस शिशु को मार डालने का आशय न रखते हुए और सदभावपूर्वक उस शिशु के फायदे के आशय से गॄह छत पर से नीचे गिरा देता है । यहां, यदि गिरने से वह शिशु मर भी जाता है, तो भी ने कोई अपराध नहीं किया ।

स्पष्टीकरण-- केवल धन संबंधी फायदा वह फायदा नहीं है, जो धारा 88, 89 और 92 के भीतर आता है ।



Indian Penal Code Section 92

Act done in good faith for benefit of a person without consent.- Nothing is an offence by reason of any harm which it may causes to a person for whose benefit it is done in good faith, even without that person's consent, if the circumstances are such that it is impossible for that person to signify consent, or if that person is incapable of giving consent, and has no guardian or other person in lawful charge of him from whom it is possible to obtain consent in time for the thing to be done with benefit: Provided-

Provisos.-First.- That this exception shall not extend to the intentional causing of death or the attempting to cause death;

Secondly.- That this exception shall not extend to the doing of anything which the person doing it knows to be likely to cause death, for any purpose other than the preventing of death or grievous hurt, or the curing of any grievous disease or infirmity;

Thirdly.- That this exception shall not extend to the voluntary causing of hurt, or to the attempting to cause hurt, for any purpose other than the preventing of death or hurt;

Fourthly.- That this exception shall not extend to the abetment of any offence, to the committing of which offence it would not extend.

Illustrations

(a) Z is thrown from his horse, and is insensible. A, a surgeon, finds that Z requires to be trepanned. A, not intending Z's death, but in good faith, for Z's benefit, performs the trepan before Z recovers his power of judging for himself. A has committed no offence.

(b) Z is carried off by a tiger. A fires at the tiger knowing it to be likely that the shot may kill Z, but not intending to kill Z, and in good faith intending Z's benefit. A's ball gives Z a mortal wound. A has committed no offence.

(c) A, a surgeon, sees a child suffer an accident which is likely to prove fatal unless an operation be immediately performed. There is not time to apply to the child's guardian. A performs the operation in spite of the entreaties of the child, intending, in good faith, the child's benefit. A has committed no offence.

(d) A is in a house which is on fire, with Z, a child. People below hold out a blanket. A drops the child, from the house-top, knowing it to be likely that the fall may kill the child, but not intending to kill the child, and intending, in good faith, the child's benefit. Here, even if the child is killed by the fall, A has committed no offence.

Explanation.- Mere pecuniary benefit is not benefit within the meaning of sections 88 89 and 92. 93.






Indian Penal Code Section 91 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 91 - Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 91

ऐसे कार्यों का अपवर्जन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है -- धारा 87,88 और 89 के अपवादों का विस्तार उन कार्यों पर नहीं है जो उस अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध हैं जो उस व्यक्ति को, जो सम्मति देता है या जिसकी ओर से सम्मति दी जाती है, उन कार्यों से कारित हो, या कारित किए जाने का आशय हो, या कारित होने की संभाव्यता ज्ञात हो ।

दृष्टांत:

गर्भपात कराना (जब तक कि वह उस स्त्री का जीवन बचाने के प्रयोजन से सदभावपूर्वक कारित न किया गया हो) किसी अपहानि के बिना भी, जो उससे स्त्री को कारित हो या कारित करने का आशय हो, स्वतः अपराध है। इसलिए वह "ऐसी अपहानि के कारण" अपराध नहीं है ; और ऐसा गर्भपात कराने की उस स्त्री की या उसके संरक्षक की सम्मति उस कार्य को न्यायमुमत नहीं बनाती।



Indian Penal Code Section 91

Exclusion of acts which are offences independently of harm cause. -- The exceptions in sections 87, 88 and 89 do not extend to acts which are offences independently of any harm which they may cause, or be intended to cause, or be known to be likely to cause, to the person giving the consent, or on whose behalf the consent is given.

Illustration

Causing miscarriage (unless caused in good faith for the purpose of saving the life of the woman) is offence inexpediently of any harm which it may cause or be intended to cause to the woman. Therefore, it is not an offence "by reason of such harm"; and the consent of the woman or of her guardian to the causing of such miscarriage does not justify the act.






Indian Penal Code Section 90 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 90 - Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 90

सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है -- कोई सम्मति ऐसी सम्मति नहीं है जैसी इस संहिता की किसी धारा से आशयित है, यदि वह सम्मति किसी व्यक्ति ने क्षतिभय के अधीन, या तथ्य के भ्रम के अधीन दी हो, और यदि कार्य करने वाला व्यक्ति यह जानता हो या उसके पास विश्वास करने का कारण हो कि ऐसे भय या भ्रम के परिणामस्वरूप वह सम्मति दी गई थी ; अथवा

उन्मत व्यक्ति की सम्मति-- यदि वह सम्मति ऐसे व्यक्ति ने दी हो या चित्तॄविकॄति या मत्तता के कारण उस बात की, जिसके लिए वह अपनी सम्मति देता है, प्रकॄति और परिणाम को समझने में असमर्थ हो ; अथवा

शिशु की सम्मति-- जब तक कि संदर्भ से तत्प्रतिकूल प्रतीत न हो, यदि वह सम्मति ऐसे व्यक्ति ने दी हो जो बारह वर्ष से कम आयु का है ।



Indian Penal Code Section 90

Consent known to be given under fear or misconception.-- A consent is not such a consent as is intended by any section of this Code, if the consent is given by a person under fear of injury, or
under a misconception of fact, and if the person doing the act knows, or has reason to believe, that the consent was given in consequence of such fear or misconception; or Consent of insane person.

Consent of insane person.- if the consent is given by a person who, from unsoundness of mind, or intoxication, is unable to understand the nature and consequence of that to which he gives his consent; or Consent of child.

Consent of child.- unless the contrary appears from the context, if the consent is given by a person who is under twelve years of age.





Indian Penal Code Section 89 - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 89 - Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 89

संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद््भावपूर्वक किया गया कार्य-- कोई बात, जो बारह वर्ष से कम आयु के या विकॄतचित्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद््भावपूर्वक उसके संरक्षक के, या विधिपूर्ण भारसाधक किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा, या की अभिव्यक्त या विवक्षित सम्मति से, की जाए, किसी ऐसी अपहानि के कारण, अपराध नहीं है जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो, या कारित करने का कर्ता का आशय हो या कारित होने की संभाव्यता कर्ता को ज्ञात हो :
परन्तुक-परन्तु-

पहला -- इस अपवाद का विस्तार साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर ने होगा;

दूसरा -- इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऎसी बात के करने पर न होगा जिसे करने वाला व्यक्ति जानता हो की उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है;

तीसरा -- इस अपवाद का विस्तार स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा जब तक कि वह मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के, या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से न की गई हो ;

दृष्टांत :

सदभावपूर्वक, अपने शिशु के फायदे के लिए अपने शिशु की सम्मति के बिना, यह सम्भाव्य जानते हुए कि शस्त्र कर्म से उस शिशु की मृत्यु कारित होगी, न कि इस आशय से कि उस शिशु को मृत्यु कारित कर दे शल्य चिकित्सक द्वारा पथरी निकलवाने के लिए अपने शिशु की शल्य क्रिया करवाता है। का उदेश्य शिशु को रोगमुक्त कराना था, इसलिए वह इस अपवाद के अंतर्गत आता है।



Indian Penal Code Section 89

Act done in good faith for benefit of child or insane person, by or by consent of guardian.-- Nothing which is done in good faith for the benefit of a person under twelve years of age, or of unsound mind, by or by consent, either express or implied, of the guardian or other person having lawful charge of that person, is an offence by reason of any harm which it may cause, or be intended by the doer to cause or be known by the doer to be likely to cause to that person: Provided-

Provisos.-First.- That this exception shall not extend to the intentional causing of death, or to the attempting to cause death;

Secondly.- That this exception shall not extend to the doing of anything which the person doing it knows to be likely to cause death, for any purpose other than the preventing of death or grievous hurt, or the curing of any grievous disease or infirmity;

Thirdly.- That this exception shall not extend to the voluntary causing of grievous hurt, or to the attempting to cause grievous hurt, unless it be for the purpose of preventing death or grievous hurt, or the curing of any grievous disease or infirmity;

Fourthly.- That this exception shall not extend to the abetment of any offence, to the committing of which offence it would not extend.

Illustration

A
, in good faith, for his child's benefit without his child's consent, has his child cut for the stone by a surgeon knowing it to be likely that the operation will cause the child's death, but not
intending to cause the child's death. A is within the exception, in as much as his object was the cure of the child.






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